Agr Payment Vodafone Idea To Wait For Supreme Court Decision – Agr मामलाः क्या आज बकाया चुकाएंगी दूरसंचार कंपनियां ?

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दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (DoT) को बताया है कि वह समायोजित सकल आय (AGR) से जुड़ी मॉडिफिकेशन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने का इंतजार करेगी। यानी वह सरकार को 23 जनवरी की डेडलाइन तक भुगतान नहीं करेगी। 

24 अक्तूबर को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को बकाया जमा करने के लिए 90 दिनों का समय दिया था। 21 जनवरी को भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत दूरसंचार कंपनियों ने 1.47 लाख करोड़ रुपये के वैधानिक बकाये के भुगतान के लिए नए सिरे से योजना बनाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में नई याचिका डाली थी। न्यायालय ने कहा था कि वैधानिक बकाये को लेकर दूरसंचार कंपनियों की याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते की जाएगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि, ‘हमें वोडाफोन आइडिया का एक संदेश मिला है, जिसमें कंपनी ने कहा है कि वह अपनी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है। याचिका में कंपनी ने एजीआर से जुड़े बकाये के भुगतान की शर्तों में ढील दिए जाने पर दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत करने की इजाजत मांगी है।’ कंपनी ने कहा है कि वह निर्णय आने के बाद ही इस मामले में कदम उठाएगी।

24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्तूबर 2019 को अपने फैसले में कहा था कि दूरसंचार कंपनियों के एजीआर में उनके दूरसंचार सेवाओं से इतर राजस्व को शामिल किया जाना कानून के अनुसार ही है। 22 नवंबर को एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें फैसले पर पुनर्विचार करने और ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को माफ करने की अपील की गई थी।  

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछले साल नवंबर में संसद को बताया था कि दूरसंचार कंपनियों पर सरकार का 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस बकाये पर जुर्माने-ब्याज पर राहत का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों पर लाइसेंस शुल्क का 92,642 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क 55,054 करोड़ रुपये बकाया है। 

इन कंपनियों पर इतना बकाया

भारती एयरटेल                        21,682.13
वोडाफोन-आइडिया                 19,823.71
रिलायंस कम्युनिकेशंस             16,456.47 
बीएसएनएल                             2,098.72 
एमटीएनएल                             2,537.48

(नोट : राशि करोड़ रुपये में, इसमें जुर्माना और ब्याज शामिल नहीं है।)

दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (DoT) को बताया है कि वह समायोजित सकल आय (AGR) से जुड़ी मॉडिफिकेशन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने का इंतजार करेगी। यानी वह सरकार को 23 जनवरी की डेडलाइन तक भुगतान नहीं करेगी। 

24 अक्तूबर को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को बकाया जमा करने के लिए 90 दिनों का समय दिया था। 21 जनवरी को भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत दूरसंचार कंपनियों ने 1.47 लाख करोड़ रुपये के वैधानिक बकाये के भुगतान के लिए नए सिरे से योजना बनाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में नई याचिका डाली थी। न्यायालय ने कहा था कि वैधानिक बकाये को लेकर दूरसंचार कंपनियों की याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते की जाएगी।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि, ‘हमें वोडाफोन आइडिया का एक संदेश मिला है, जिसमें कंपनी ने कहा है कि वह अपनी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रही है। याचिका में कंपनी ने एजीआर से जुड़े बकाये के भुगतान की शर्तों में ढील दिए जाने पर दूरसंचार विभाग के साथ बातचीत करने की इजाजत मांगी है।’ कंपनी ने कहा है कि वह निर्णय आने के बाद ही इस मामले में कदम उठाएगी।

24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्तूबर 2019 को अपने फैसले में कहा था कि दूरसंचार कंपनियों के एजीआर में उनके दूरसंचार सेवाओं से इतर राजस्व को शामिल किया जाना कानून के अनुसार ही है। 22 नवंबर को एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें फैसले पर पुनर्विचार करने और ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को माफ करने की अपील की गई थी।  

दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछले साल नवंबर में संसद को बताया था कि दूरसंचार कंपनियों पर सरकार का 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। साथ ही उन्होंने कहा था कि इस बकाये पर जुर्माने-ब्याज पर राहत का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा था कि दूरसंचार कंपनियों पर लाइसेंस शुल्क का 92,642 करोड़ रुपये और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क 55,054 करोड़ रुपये बकाया है। 

इन कंपनियों पर इतना बकाया

भारती एयरटेल                        21,682.13
वोडाफोन-आइडिया                 19,823.71
रिलायंस कम्युनिकेशंस             16,456.47 
बीएसएनएल                             2,098.72 
एमटीएनएल                             2,537.48

(नोट : राशि करोड़ रुपये में, इसमें जुर्माना और ब्याज शामिल नहीं है।)

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